अहलेबैत न्यूज़ एजेंसी (अबना) की रिपोर्ट के अनुसार मरजए तक़लीद आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी नें इराक़ में इस्लामी पवित्र स्थलों की रक्षा करने के सिलसिले में अल्लाह की राह में जेहाद को वाजिब बताते हुए कहा है कि इस्लाम और अहलेबैत के चाहने वाले जवान अपने को पूरी तरह तैयार रखें और ज़रूरत के समय और इराक़ी सरकार की तरफ़ से कहे जाने के बाद फ़ौज के साथ जाकर मिल जाएं। उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि तकफ़ीरी आतंकवादियों और अरब देश और इस्राईल के पिट्ठुओं नें सीरिया में कड़ी हार का सामना करने के बाद अब इराक़ में उसका बदला लेने की ठान ली है, वह यह सोच रहे थे कि वह इराक़ में शिया सुन्नी लड़ाई की बात छेड़कर फ़ौजी सिस्टम में हलचल पैदा कर के बहुत जल्दी ही सफलता पा जाएंगे। लेकिन थोड़े ही समय में हमने देख लिया कि उन्हें मुँह की खानी पड़ी औऱ इराक़ी जनता, शिया, सुन्नी, कुर्द जिन्होंने अपनी जान, अपनी इज़्ज़त, माल और देश को तकफ़ीरी धमकियों के हाथों पामाल होते हुए देखा कि यह लोग किसी पर भी रहम नहीं कर रहे हैं, एक साथ उठकर खड़े हुए और इराक़ की फ़ौज के साथ मिल गए और हौज़ए इल्मिया नजफ़ के मराजए केराम की आवाज़ पर लब्बैक कह कर लगभग बीस लाख लोगों नें अल्लाह के लिये जेहाद के लिये नाम लिखवाए और जिन्हें ट्रेनिंग की ज़रूरत थी उन्होंने ट्रेनिंग शुरू कर ली और इन्शा अल्लाह इराक़ की सभी क़ौमें और सभी समुदायों के मानने वाले एक साथ आ जाएंगे।
तकफ़ीरी आतंकवादी और उनके समर्थक यह जान लें कि ज़रूरत पड़ने पर लाखों और करोड़ों लोग दूसरे देशों से भी वैसे ही जैसे इमाम हुसैन अ. के चेहल्लुम पर पैदल दुनिया के कोने कोने से करबला आ जाते हैं उसी तरह इराक़ की रक्षा के लिये भी आएंगे और इराक़ी फ़ौज की मदद करेंगे।
26 जून 2014 - 16:15
समाचार कोड: 619275
आयतुल्लाह मकारिम शीराज़ी नें इराक़ में इस्लामी पवित्र स्थलों की रक्षा करने के सिलसिले में अल्लाह की राह में जेहाद को वाजिब बताते हुए कहा है कि इस्लाम और अहलेबैत के चाहने वाले जवान अपने को पूरी तरह तैयार रखें और ज़रूरत के समय और इराक़ी सरकार की तरफ़ से कहे जाने के बाद फ़ौज के साथ जाकर मिल जाएं।